लखनऊ में श्रीराम जन्मोत्सव 5.0 का भव्य शुभारंभ
Grand Launch of Shri Ram Janmotsav
वेदांत भारत की ओर से डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भव्य आयोजन
आरएसएस के अवध प्रांत प्रचारक कौशल बोले-रामचरित मानस में जीवन की हर समस्या का समाधान
लखनऊ। Grand Launch of Shri Ram Janmotsav, राजधानी के प्रतिष्ठित डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान में शनिवार से श्रीराम जन्मोत्सव 5.0 का दो दिवसीय भव्य आयोजन शुरू हुआ। मुख्य आडीटोरियम व मिनी आडीटोरियम दोनों में चर्चा भगवान राम के नाम और उनके अनगिनत कार्यों की हो रही है।
वेदांत भारत की ओर से श्रीराम जन्मोत्सव 5.0 का दो दिवसीय भव्य आयोजन शुरू हुआ। वेदांत भारत से जुड़े शहर के प्रख्यात व भावी चिकित्सक चार वर्षों से ऐसा समारोह अलग-अलग स्थानों पर करते रहे हैं, इस बार डॉ. लोहिया संस्थान के अकादमिक ब्लाक की दसवीं मंजिल पर बना आडीटोरियम आयोजन को मिली ऊंचाइयों का बखान कर रहा था।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अवध प्रांत प्रचारक कौशल ने कहा कि जीवन में अंतर्कलह, आपसी द्वेष, विवाद करने वालों को भगवान राम के जीवन को देखना चाहिए। रामचरित मानस में हर समस्या का समाधान है। हम सब माता, पिता, भाई, मित्र, गुरु, पत्नी और शत्रु से भी कैसा व्यवहार करें। यह राम से सीखिए।
भगवान राम ने निषादराज को गले लगाया, माता शबरी के बेर खाए तो हमको ऊंच-नीच, अगड़ा-पिछड़ा और अस्पृश्यता को क्यों मानना चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा, पर हित सरिस धरम नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥ यानी दूसरों की भलाई (परोपकार) करने के समान कोई दूसरा बड़ा धर्म नहीं है।
सुखद है कि लोहिया संस्थान इसी मार्ग पर चल रहा है और भावी चिकित्सकों को राम से जोड़कर करुणा, दया, प्रेम व समरसता का पाठ पढ़ा रहा है। उन्होंने अनुरोध किया, सभी को अयोध्या जाकर भगवान राम के दिव्य-भव्य और दुनिया को आलोकित करने वाले मंदिर और रामलला का दर्शन करना चाहिए। यह भाव हम सबको रामचरित मानस सिखाता है।
डॉ. लोहिया संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विक्रम सिंह ने आयोजन की उपयोगिता समझाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्थान धर्म निरपेक्ष नहीं हो सकता, क्योंकि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी ही उसका वास्तविक धर्म है। सवाल किया, क्या जिम्मेदारी से भागना चाहिए। उन्होंने जवाब देते हुए कहा, कदापि नहीं, हर व्यक्ति को धर्म सापेक्ष होकर कार्य करने की जरूरत है। चिकित्सक में लोग भगवान का रूप देखते हैं, ऐसे में डाक्टरों को हर रोगी को निरोगी रखने का संकल्प लेना होगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने इसी संदर्भ को विस्तार देते हुए कहा कि मेडिकल इंस्टीट्यूट में रामचरित मानस पर चर्चा इसलिए होनी चाहिए क्योंकि भगवान राम ही प्राणियों को जीवन जीने की कला सिखाते हैं। यह भी कहा कि भगवान राम कल्पना नहीं हैं, सत्य हैं, मर्यादा में रहना और हर कार्य मर्यादित ढंग से करने में ही समाज और राष्ट्र की उन्नति होगी।
कार्यक्रम में कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो. मदन लाल ब्रह्म भट्ट, प्रो. राना पीबी सिंह, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अरविंद सिंह, प्रो. संजीत सिंह, प्रो. तुशांत सिंह, प्रो. मनीष कुलश्रेष्ण, प्रो. नवीन जामवाल, केजीएमयू के प्रो. सुमित रूंगटा व प्रो. केके सिंह समेत कई चिकित्सक उपस्थित रहे।
आकर्षक साज-सज्जा
कार्यक्रम में तोरणद्वार सजे हैं। पीत, श्वेत और लाल रंग के गूंथे पुष्पों की लड़ियां सुगंध बिखेर रही। नवरात्र के अवसर पर यह किसी मंदिर की सजावट नहीं, बल्कि डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान में दसवीं मंजिल पर बने आडीटोरियम की थी। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र पुलकित रावत नाम पूछकर प्रवेश पत्रक दे रहे और एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा अनन्या अतिथि के मस्तक पर टीका लगाती हैं। प्रवेश करते ही वाल्मीकि रामायण व अगल-बगल सारस की झांकी, राजा राम, सियावर राम, भक्त शिरोमणि हनुमान और फूलों की रंगोली बरबस आकर्षित करती है।
देशभर के युवा विद्वतजन पढ़ रहे शोधपत्र
वेदांत भारत वाल्मीकि रामायण व तुलसी कृत रामचरित मानस आज के दौर में कितनी प्रासंगिक है, इस पर विशद मंथन करा रहा है। मित्र मोहन शेनाय, अवधेश पांडेय, जितेंद्र कृष्ण मूर्ति, सौरभ कुमार, पूजा यादव आदि ने रामायण में शासन, नैतिकता और सार्वजनिक नीति पर शोध पत्र पढ़ा है। ऐसे ही सक्षम शुक्ल, पायल सिंह, सार्थक महाजन, पुष्कर चित्रांशी श्रीवास्तव, नीलम झा, पवन कुमार शुक्ल आदि ने रामचरित मानस में स्वास्थ्य, चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सिद्धांत और आंतरिक स्थिरता पर, डा. राजेश कुमार मिश्र, सौरभ कुमार यादव, आशुतोष राजपूत, अखिलेंद्र कुमार मिश्र आदि रामायण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण चेतना के अनुप्रयोग और प्रतीक खन्ना, ज्योति, श्रेया सिंह, भीम सिंह व श्रेया त्रिपाठी आदि रामायण में समग्र शिक्षा और नेतृत्व विकास पर शोध पत्र पढ़ेंगी। देशभर के विभिन्न राज्यों से पहुंचे विद्वतजन व युवाओं के पढ़े जा रहे शोधपत्रों के निर्णायक भी चिकित्सक, रामायण व रामचरित मानस के ज्ञानी जन ही बने हैं।
आज बहेगी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रसधार
समारोह में रविवार सुबह शोध पत्र पढ़े जाएंगे तो शाम साढ़े चार बजे से विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रसधार बहेगी। समूह गायन, नृत्य नाटिका, एकल गायन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भावी चिकित्सक ही प्रस्तुतियां देंगे। पुरस्कार वितरण के बाद श्रीराम की आरती से भव्य समारोह पूर्ण होगा।
वेदांत भारत का उद्देश्य
भारतीय युवाओं और चिकित्सकों के व्यक्तित्व में भारतीय ज्ञान परंपरा के निहित व नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक ज्ञान को समावेशित करना, ताकि देश को समृद्ध बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई जा सके।